My first poem

I did not like Hindi a lot. I preferred English more over Hindi due to the easy grammatical concepts English had over Hindi. It was thus a little ironical that I wrote my first poem ever in Hindi. The poems I write today are in English but that poem holds a special place.I recited that poem in a school competition and won the second prize. Even today, some people recognize me as ‘the boy who wrote a poem’.

The poem is based on a girl who is thought to be a burden and is married off early. She then studies hards and passes the examination with flying colours. The poem is titled as ‘सफलता की चढ़ाई ‘ or the ‘Road to Success’:

एक दिन बिजली कड़की,

हुई एक छोटे से घर में एक लड़की

परिवार से सोचा थी यह बोज,

पिता ने पूछा क्या करेगी ये खोज?

इसलिए बचपन में ना पढ़ाया ना लिखाया,

सिर्फ घरेलु काम करना ही उसे सिखाया

शादी के बाद पिता ने लिया आराम,

अब जीवन में नहीं बचा था उसका कोई काम

ससुराल में रोज़ होती पीट-मार,

लड़की पर होते हर तरह के अत्याचार,

लेकिन लड़की थी बहुत वीर,

अब पढ़ना लिखना था उसका तीर

लिखी पढ़ी वह चुप-चुपके,

बिलकुल एक साया के रूप में,

चलता जा रहा था यह वक़्त,

नियम हो रहे थे और भी सख्त

लेकिन वह लिखी पढ़ी,

एक हाथ में किताब सो दूसरे में रसोई की कढ़ी

सीखा अंग्रेजी C-A-R में होता है कार,

और गणित में दो और दो होते है चार

अंग्रेजी, गणित और विज्ञान,

ये थे उसके तलवार म्यान

अंत में म्हणत हुयी सफल,

जब दसवीं की परीक्षा में आयी अव्वल

मिली इज़्ज़त और हज़ारो का ईनाम,

देश भर में हुआ उसका नाम

जब परिवार से हुआ उसका मेल,

तब परिवार ने पूछा कैसा यह खेल,

तब वह लड़की बोली

याद करो, एक दिन बिजली कड़की,

मुबारक हो हुई है लड़की!

मुबारक हो हुई है लड़की!

मुबारक हो हुई है लड़की!

धन्यवाद

Written on February 20, 2018